आज रात तुम जा रही हो
हमारे इकलोते बेटे से मिलने
कितनी खुश
हो सुबह से
उसके ख्यालो में डूबी
रत्ती भर भी चिंता
नहीं मेरी,
कैसे जियूँगा बिन तुम्हारे
कैसे जियूँगा बिन तुम्हारे
तुम जानती हो की मैं जी ही लूँगा
मैं भी यह जानता हूँ क़ि
बेटा कई
वर्षो से इंतज़ार कर रहा है
उसके पास तुम्हारा
होना ज़रूरी है
बनिस्पत मेरे साथ रहना
मेरे साथ तो
ज़िन्दगी ही
बिता दी है तुमने
उसकी ज़रुरत माँ है,
वह
अकेला है वर्षो से
अकेला ही लड़ रहा है
अपने हालात
से,
उसको तुम्हारी ज़रुरत है
अपनी माँ की,
मैं खुश हूँ की तुम खुश हो
और यह दिन
यूं ही कट जायेंगे
बिना किसी खास परेशानी के
तुम
जायो और जाकर उसे ढेर सी
खुशियाँ दो, उसका ललाट चूम लो,
कभी कभी तुम्हारा घर में न
होना
खलेगा ज़रूर, पर
वक़्त का क्या है
वक़्त तो यूं ही कट जायेगा
वक़्त तो यूं ही कट जायेगा
विनोद पासी "हंसकमल"
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