अगर पाप धुलते नदियों और सरोवरों में डुबकी लगाने से
तो तो कम से कम भारत में तो कोई पापी ना होता?
गंगा, काशी, मानसरोवर सब शुद्ध पानी के स्रोत्र है
इनको नाम दिया और पवित्र बनाया है हमारी आस्था ने
पाप धुलते है केवल और केवल प्रायश्चित से
कही कोई वर्णन है रामायण या महाभारत में
जहाँ अपने पाप धोये हो किसी ने किसी सरोवर में
गंगा और गंगोत्री तो बहती है हमारे ह्रदय में
हर प्राणी में बसा है नर और नारायण
नर सांसारिक मोह माया में उलझता हुआ और
नारायण ज्ञान कराता है अच्छे बुरे का
पर नारायण तो सारथी है,
विनोद पासी " हंसकमल"
तो तो कम से कम भारत में तो कोई पापी ना होता?
गंगा, काशी, मानसरोवर सब शुद्ध पानी के स्रोत्र है
इनको नाम दिया और पवित्र बनाया है हमारी आस्था ने
अन्य देशो में किसी और नाम से जानी जाती होंगी
पर वहां हमारी आस्था नहीं मानती इनको
पर वहां हमारी आस्था नहीं मानती इनको
पाप धुलते है केवल और केवल प्रायश्चित से
कही कोई वर्णन है रामायण या महाभारत में
जहाँ अपने पाप धोये हो किसी ने किसी सरोवर में
गंगा और गंगोत्री तो बहती है हमारे ह्रदय में
हर प्राणी में बसा है नर और नारायण
नर सांसारिक मोह माया में उलझता हुआ और
नारायण ज्ञान कराता है अच्छे बुरे का
पर नारायण तो सारथी है,
जो कभी निर्णय नहीं लेता, हम पर छोड़ देता है
उसी निर्णय पर बनता और बिगड़ता है हमारा भाग्य
धारचूला, सिर्खा, बुधि, गूंजी, कालापानी, नाभिदांग
तो बस पड़ाव है यात्रा के, खूबसूरत नजारो के,
कैलाश और मानसरोवर तो प्रतीक है उस छवि के
जिसे लोचने से देख मन मंत्र मुघ्द हो लेता है
परिकर्मा कैलाश या मानसरोवर की नहीं
परिकर्मा को करनी है अपने मन की
मन में बसा है हर प्राणी के एक सरोवर
उसी को ज्ञानी कहते है मानसरोवर
उस मानसरोवर में कभी तुम जा कर देखो
कभी उसमे डुबकी लगा कर के देखो
कभी अपने कर्मो का प्रायश्चित करके तो देखो
जिसे दुःख पहुचाये है उनसे तहे दिल से
माफ़ी मांग के तो देखो, सब पाप धुल जायेंगे
कभी तुम इसको आजमा के तो देखो
कभी तुम इसको आजमा के तो देखो
उसी निर्णय पर बनता और बिगड़ता है हमारा भाग्य
धारचूला, सिर्खा, बुधि, गूंजी, कालापानी, नाभिदांग
तो बस पड़ाव है यात्रा के, खूबसूरत नजारो के,
कैलाश और मानसरोवर तो प्रतीक है उस छवि के
जिसे लोचने से देख मन मंत्र मुघ्द हो लेता है
परिकर्मा कैलाश या मानसरोवर की नहीं
परिकर्मा को करनी है अपने मन की
मन में बसा है हर प्राणी के एक सरोवर
उसी को ज्ञानी कहते है मानसरोवर
उस मानसरोवर में कभी तुम जा कर देखो
कभी उसमे डुबकी लगा कर के देखो
कभी अपने कर्मो का प्रायश्चित करके तो देखो
जिसे दुःख पहुचाये है उनसे तहे दिल से
माफ़ी मांग के तो देखो, सब पाप धुल जायेंगे
कभी तुम इसको आजमा के तो देखो
कभी तुम इसको आजमा के तो देखो
No comments:
Post a Comment