अचानक बदली क्या घिर आयी
गगन की छाती फट आयी
शीतल पवन के झोंकों नें
किवाड़ खिड़कियाँ बंद करवाई
कुछ पल में उम्रड़ते बादलों में
बिजली ने अपनी चमक दिखलाई
छोटी तेज बूंदों ने षण में
धरती पर प्रदापन किया
तड़ाक तड़ाक के चपेटो से
ओलों ने उनका पीछा किया
हरी-भरी डूब पर, रुई सृद्र्ष बर्फ बिखर आयी
नन्हे कोंपल पौधों की अकस्मात मौत चली आयी
गृहणियां घरो से बर्तन ले बाहर आयी
बच्चों के लिए तो जैसे बाहर तमाशा लाई
कुछ पलों को सफ़ेद चादर से ढकी य़े शाम
हर और खुशियाँ ले आयी
आज की शाम तो मानों हमें
दिल्ली से पहलगाम ले आयी
विनोद पासी "हंसकमल"
गगन की छाती फट आयी
शीतल पवन के झोंकों नें
किवाड़ खिड़कियाँ बंद करवाई
कुछ पल में उम्रड़ते बादलों में
बिजली ने अपनी चमक दिखलाई
छोटी तेज बूंदों ने षण में
धरती पर प्रदापन किया
तड़ाक तड़ाक के चपेटो से
ओलों ने उनका पीछा किया
हरी-भरी डूब पर, रुई सृद्र्ष बर्फ बिखर आयी
नन्हे कोंपल पौधों की अकस्मात मौत चली आयी
गृहणियां घरो से बर्तन ले बाहर आयी
बच्चों के लिए तो जैसे बाहर तमाशा लाई
कुछ पलों को सफ़ेद चादर से ढकी य़े शाम
हर और खुशियाँ ले आयी
आज की शाम तो मानों हमें
दिल्ली से पहलगाम ले आयी
विनोद पासी "हंसकमल"
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