Saturday, 30 June 2012

बेरहम सड़के

 
बेरहम सड़के
 
ये अंतहीन बेरहम चिकनी चुपड़ी  सड़के
और इन पर हर पल  दौड़ते  लाखो  वाहन
अरमानो और जोश से भरपूर जिंदगियां,
और सडको पर  बेजिझक  घूमते जानवर
हर किसी को  है हर पल आगे पहुँचने
की जल्द-बाजी.......
 
कभी कभी जिंदगी  की रेस में
हार जाती है जिंदगी  जिन्दगी से
सड़क पर दम तोड देती  है  बेचारी ज़िन्दगी
कुछ देर के लिए ट्रेफिक  भी डेवेर्ट होता  है
लोग गाड़ियों से सर निकाल निकाल  देखते  है
"ओह माय गोड़" " च च" भी निकलता  है मुंह से
समाचार  पत्रों में फोटो भी छपती है
पुलिस तस्वीरे भी खिचती है और
कुछ ही पलों में  साफ़ हो जाता है,
सारा इंसानी और पाशविक खून
लाशे उठा ली जाती है, 
वाहनों का कबाड़
हटा लिया  जाता  है,
साफ़ हो जाता है
सारा मंज़र
 

फिर से दौड़ने  लगती है यह बेरहम सड़के
और उन पर फिर से नयी जिन्दगिया,
जैसे की कभी कुछ हुआ ही न हो,
फिर  शुरू होती है  एक नयी जंग,
ज़िन्दगी और बेरहम सडको के बीच
 विनोद पासी " हंसकमल" 
 
 
 
 

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