बेरहम सड़के
ये अंतहीन बेरहम चिकनी चुपड़ी सड़के
और इन पर हर पल दौड़ते लाखो वाहन
अरमानो और जोश से भरपूर जिंदगियां,
और सडको पर बेजिझक घूमते जानवर
हर किसी को है हर पल आगे पहुँचने
की जल्द-बाजी.......
कभी कभी जिंदगी की रेस में
हार जाती है जिंदगी जिन्दगी से
सड़क पर दम तोड देती है बेचारी ज़िन्दगी
कुछ देर के लिए ट्रेफिक भी डेवेर्ट होता है
लोग गाड़ियों से सर
निकाल निकाल देखते है
"ओह
माय गोड़" " च च" भी निकलता है मुंह से
समाचार
पत्रों में फोटो भी छपती है
पुलिस तस्वीरे भी
खिचती है और
कुछ ही
पलों में साफ़ हो जाता है,
सारा इंसानी और पाशविक खून
सारा इंसानी और पाशविक खून
लाशे
उठा ली जाती है,
वाहनों
का कबाड़
हटा लिया जाता
है,
साफ़ हो जाता है
सारा मंज़र
फिर से दौड़ने लगती है यह बेरहम सड़के
साफ़ हो जाता है
सारा मंज़र
फिर से दौड़ने लगती है यह बेरहम सड़के
और
उन पर फिर से नयी जिन्दगिया,
जैसे
की कभी
कुछ हुआ ही न हो,
फिर
शुरू होती है एक नयी जंग,
ज़िन्दगी और बेरहम सडको के बीच
ज़िन्दगी और बेरहम सडको के बीच
विनोद
पासी " हंसकमल"
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