Saturday, 30 June 2012

सत्यमेव जयते को समर्पित

सत्यमेव जयते को समर्पित

जिस सुबह की चाहत में हमने बरसो  इंतज़ार किया, 
भारत की जिस तस्वीर देखने को, बरसो इंतज़ार किया
जिस सुबह की खातिर ही, हजारों लोगो ने संगर्ष किया
जिस सुबह की खातिर ही, लोगों को बहिष्कार मिला 

उस सुबह की किरण अब दस्तक दे रही है पूरे  भारत में
मिल कर वो ज्ञान की आंधी, अब बहने लगी है हृदयों में
नींद से सोये लोगों की, आंखे भी  खुल रही  है धीरे से
वैचारिक क्रांति देती है   दस्तक, हर सप्ताह रविवार से

आमिर का टेली शो सत्यमेव जयते बना  है चर्चा का विषय
उसमे  जो आइना दिखता है, वो कुंठित  सोच का  विकृत रूप है
उन कुरीतियों को पहचानना है, उनको मिल के हटाना है
जीने का हक है हम सबको, फिर क्यों किसी को दुत्कारना है

विनोद पासी "हंसकमल"



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