सुखद एहसास
तेरे संगमरमरी गदरे बदन को
पारदर्शी श्वेत लिबास में.
शीतल जल-कणों से भीगता देख
मेरी धड़कने तेज हो रही है
पर्दा सा छाने लगा है
धुन्द का, पलके भिच रही है
तेरे रूप का दीदार करने को
डर है कहीं तुझे इसका
एहसास न हो जाए
विनोद पासी "हंसकमल"
तेरे संगमरमरी गदरे बदन को
पारदर्शी श्वेत लिबास में.
शीतल जल-कणों से भीगता देख
मेरी धड़कने तेज हो रही है
पर्दा सा छाने लगा है
धुन्द का, पलके भिच रही है
तेरे रूप का दीदार करने को
डर है कहीं तुझे इसका
एहसास न हो जाए
विनोद पासी "हंसकमल"
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