Wednesday, 4 July 2012

कीव( उक्रेन)



अथाह सर्द मौसम में भी
कीव की धूप में ताप नहीं
नमक मेंतेज नहीं
चीनी में मिठास नहीं
भांति भांति के सुन्दर फूलों में सुगंध नहीं

सड़के चौड़ी  बहुत चौड़ी
दिल छोटे, बहुत छोटे
सुन्दर देहे, बुझे चेहरे
भरपूर नग्नता, शर्मो ह्या नदारद
रिश्तो की गर्माहट, आत्मीयता
सब कुछ नदारद

सबसे ऊपर है बस पैसा और पैसा
पैसा ही जब बन जाए मजहब
तो फिर क्या कीव और
क्या कोई और शहर

विनोद पासी "हंसकमल"

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