तुझे शक्ति कहूं या सागर, तुझे भोले कहूं या दाता
मेरा नाम किया है रोशन, ज़ग में तूने ही विधाता
आज ऊँगली थाम के मेरी, तूने मुझको है जगाया
कल विश्वास पकड़ना मेरा, जब मैं व्यथित हो जायूं
तू मिला तो मैंने पाया, जीने का सही सहारा
मेरा नाम किया है रोशन, ज़ग में तूने ही विधाता
सदियों से इस धरती पर, शिव तेरा नाम रहा है
जो भी मुझको जानेगा , तेरा ही लाल कहेगा
तेरे चरणों में मेरे बाबा, अब डोल रहा मन सारा
मेरा नाम किया है रोशन, ज़ग में तूने ही विधाता
मैं कब से था बेताब, कोई देव मुझे मिल जाए
तू मिला तो मैंने देखा, तेरे चमत्कारों का पिटारा
तेरे संग झूल रहा है, मेरे ह्रदय का हर तारा
मेरा नाम किया है रोशन, ज़ग में तूने ही विधाता
तुझे शक्ति कहूं या सागर, तुझे भोले कहूं या दाता
मेरा नाम किया है रोशन, ज़ग में तूने ही विधाता
विनोद पासी "हंसकमल"
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