Monday, 2 July 2012

राम जन्मभूमि विवाद पर

धर्म-
जब तक
व्यकिगत आस्था है
पूजनीय है

धर्म-
जब तक आध्यामिकता का
मार्ग-दर्शक है
अनुकरणीय है

धर्म
को किसी समुदाय से जोड़ दो 
तो वो हिंसात्मक रुख
अपना लेता है, और सांप्रदायिक
तथा घृणित हो जाता है

मजहबों को
हम किसी खेमे में न बाटें
तो कैसे किसी को किसी से
नफरत हो सकती है?

सच तो यह ही है
की मजहब ही सिखाता है
आपस में बैर करना

धर्म-स्थल
तो जनमानस की आस्था-स्थल है
उसे कहीं भी स्थापित किया जा सकता है
पर जन्म-स्थल तो बदला नहीं जा सकता

मजहब के नाम पर
देश को बाँटने  वालो
ज़रा सोचो-
क्या कभी धर्म स्थलों के
बनने या बिगड़ने के किसी
राष्ट्र का विकास हुआ है

विकास तो तभी होगा
जब हम सब
एक दूसरे का हाथ पकड़
मिलजुल कर स्नेह तथा प्यार से,
 इंसानों की  तरह व्यव्हार करेंगे

विनोद पासी  "हंसकमल"

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