कौन हो, क्या हो, कहाँ से आयी हो
पूंछूं क्यों, जब यूं ही मन को भाई हो
कलियों की मुस्कान में तुम
फूलों के पराग में तुम
नदियों के कलकल में तुम
बादलों की गर्जन में तुम
पक्षियों के चहकने में तुम
बिजली की चमक में तुम
इन्द्रधनुष के रंगों में तुम
चित्रकला के चित्र में तुम
सिनेमा के परदे पर तुम
अंतहीन सडको पर तुम
सत्ता के गलियारों में तुम
कहाँ नहीं हो तुम-
बिस्तर की गर्माहट में तुम
गले की खराश में तुम
बुखार के ताप में तुम
दर्द की कराह में तुम
मिठाई की मिठास में तुम
नमकीन के नमक में तुम
हवा-पानी, भूमंडल में तुम
मिट्टी, पत्थर, कंकर में तुम
तुम्हीं हो मेरी प्रेरणा
तुम्हीं हो मेरे गीत
तुम्हीं मेरी कविता
तुम्हीं मेरे मीत
सब कुछ त्याग
ह्रदय में बस गयी हो
मेरे भीतर, मेरे बाहर
अब तुम्हीं तुम,
बस तुम्हीं तुम
विनोद पासी "हंसकमल"
पूंछूं क्यों, जब यूं ही मन को भाई हो
कलियों की मुस्कान में तुम
फूलों के पराग में तुम
नदियों के कलकल में तुम
बादलों की गर्जन में तुम
पक्षियों के चहकने में तुम
बिजली की चमक में तुम
इन्द्रधनुष के रंगों में तुम
चित्रकला के चित्र में तुम
सिनेमा के परदे पर तुम
अंतहीन सडको पर तुम
सत्ता के गलियारों में तुम
कहाँ नहीं हो तुम-
बिस्तर की गर्माहट में तुम
गले की खराश में तुम
बुखार के ताप में तुम
दर्द की कराह में तुम
मिठाई की मिठास में तुम
नमकीन के नमक में तुम
हवा-पानी, भूमंडल में तुम
मिट्टी, पत्थर, कंकर में तुम
तुम्हीं हो मेरी प्रेरणा
तुम्हीं हो मेरे गीत
तुम्हीं मेरी कविता
तुम्हीं मेरे मीत
सब कुछ त्याग
ह्रदय में बस गयी हो
मेरे भीतर, मेरे बाहर
अब तुम्हीं तुम,
बस तुम्हीं तुम
विनोद पासी "हंसकमल"
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