कोहरे से भरी एक सुबह( दमिश्क में)
कोहरे से भरी सुबह
टोपी, मफलर. शाल ओढ़े
हाथों में गर्म दस्ताने पहने
हम कई बार चले थे
कुल्लू मनाली में
शिमला के माल रोड पर
और दिल्ली के कई पार्को में
सूखे-टूटे पतों पर गुज़रते
चरमराते पतों के चीखें भी सुनी
ठीक उसी तरह जैसे कोई कुचल
गया हो किसी को वाहन तले
पर यहाँ दमिश्क के पार्क में
नर्म घास पर कोहरे की चादर में
झील के ठन्डे पानी में भी
बतखें गर्व से तैर रही है
कुछ दुबक कर बेठी है
कच्चे घरो में
शायद थक हार कर
आराम कर रही हो
इक्का दुक्का वाहन दिखते है कभी
कहीं कोई शोर शराबा नहीं
कहीं कोई धूल मिट्टी नहीं
सड़के भी साफ सुथरी है
चाय की कोई दूकान भी नहीं
शुद्ध हवा और सन्नाटे के सिवा
यहाँ कुछ भी नहीं, फिर भी
अच्छा लगता है यहं सुबह आना
विनोद पासी "हंसकमल"
कोहरे से भरी सुबह
टोपी, मफलर. शाल ओढ़े
हाथों में गर्म दस्ताने पहने
हम कई बार चले थे
कुल्लू मनाली में
शिमला के माल रोड पर
और दिल्ली के कई पार्को में
सूखे-टूटे पतों पर गुज़रते
चरमराते पतों के चीखें भी सुनी
ठीक उसी तरह जैसे कोई कुचल
गया हो किसी को वाहन तले
पर यहाँ दमिश्क के पार्क में
नर्म घास पर कोहरे की चादर में
झील के ठन्डे पानी में भी
बतखें गर्व से तैर रही है
कुछ दुबक कर बेठी है
कच्चे घरो में
शायद थक हार कर
आराम कर रही हो
इक्का दुक्का वाहन दिखते है कभी
कहीं कोई शोर शराबा नहीं
कहीं कोई धूल मिट्टी नहीं
सड़के भी साफ सुथरी है
चाय की कोई दूकान भी नहीं
शुद्ध हवा और सन्नाटे के सिवा
यहाँ कुछ भी नहीं, फिर भी
अच्छा लगता है यहं सुबह आना
विनोद पासी "हंसकमल"
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