Monday, 2 July 2012

अपनी अर्धांगिनी और हर युगल के लिए 
तुमसे ही है ज़िन्दगी
तुमसे ही जुडी है हर  डोर
तुम ही हो आधार मेरा
तुम ही हो  मेरी धुरी

यह सोचना भी मुश्किल है
क्या होता जो तुम ना होती
शायद मैं वो मैं ना होता
जो मैं हूँ आज अभी

अच्छा बुरा कुछ भी हो सकता था
अगर बिछुड़ जाते  हम राह में
पर हमने खायी थी कसम
साथ निभाने की , न की बिछुड़ने की

मुड़ के देखें तो पा लिया वो सब कुछ
जो शायद न मिलता, अगर बिछुड़ जाते
अविश्वास या शक की बिनाह   पर
हमारे प्यार और साथ ने दिया
चट्टान सा आधार  बच्चे को

उसे ताक़त दी ज़माने को समझने की
ज़माने से लड़ने की शक्ति दी
और दिया वो आत्म विश्वास
जिससे बना वो एक सभ्य  नागरिक

मेरी उस हर माँ बाप से है यह प्राथना
अगर चाहते हो  अपने बच्चो का भला
तो आपस में रहो  प्यार से  और
करो एक दूसरे की इज्ज़त
बिखड़े घरो के बच्चे कभी जी
नहीं पाते चैन से, विश्वास नहीं
कर पाते किसी पर कभी पूर्णता

माँ बाप के  आपसी प्यार से ही
बच्चो को मिलता है बेमिसाल
आत्म विश्वास, उनके लिए तुम्हारा
ये तोहफा रहेगा हरदम बेमिसाल

विनोद पासी 'हंसकमल"


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