Monday, 23 July 2012

जनता के सेवक




कितनी  हास्यापद लगती है बात की  इस देश में 
जनता के सेवक, जनता की सेवा करना चाहते है?
अपनी मर्ज़ी के विभाग  का मिनिस्टर बन कर
अपने आप को मिनिस्टर या चीफ मिनिस्टर बना कर


क्या मिनिस्टर या चीफ़ मिनिस्टर बने बिना
कोई जनता की सेवा नहीं हो सकती?
क्या महात्मा गाँधी, विनोबा  भावे, मदर टेरेसा,
अन्ना हजारे और हजारो लाखो लोगो  ने
मेहनत और ईमानदारी से कार्य करके
 
अपने देश की कोई  सेवा नहीं की

जहाँ जनता के सेवक बनने के लिए करोड़े
 
रुपये इन्वेस्ट करने पड़ते हो,
जहाँ  करोडो में खेलने  के लिए
जन प्रतिनिधि बनना किसी भी
व्यापार से बेहतर हो

वहां यह सेवा का ढकोसला क्यों,
क्यों नहीं कहते राजनीति हमारा व्यापार है
हम आये है कमाए, न की लुटाने के लिए
आज जब सब कमा खा  रहे है तो क्यों
उम्मीद करते हो हमसे की हम
पाक साफ़ रहे जीवन भर,
आखिर हम भी तो इसी समाज का अंग है

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