प्रिय मित्रों,
मुझे आप सब को
यह बताते हुए हर्ष हो रहा है क़ि आज मैं हिंदी संसथान कुरूनेगला (श्री
लंका) में हिंदी दिवस का प्रमुख अतिथि बन कर गया था. आप लोगों के लिए, यह
बात गर्व की होगी, की भारतीय कला केंद्र, कोलोम्बो, में आंशिक रूप से
हिंदी पढ़ाने वाली एक श्री लंकन युवती श्रीमती अथिला किशनी कोथालावाला,
कुर्नेगला में अपने पैसे और संसाधनों से पिछले १२ वर्षो से श्री लंका के
बच्चो को प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च भाषा का ज्ञान दे रही है. इस कार्य
में अब उसकी छोटी बहेन भी उसकी मदद कर रही है. वह अपने पैसो से ही हिंदी
की पुस्तके खरीदती है, और अपने संसथान का सारा कार्य काज खुद ही करती है.
उसके किराये के हाल में मैंने उन सभी महान कवियों और हिंदी के लेखकों की
framed फोटो लगी देखी जो आजकल शायद किसी भारतीय विश्व-विद्यालय में भी
देखने को न मिले. और अचरज की बात तो य़े, की उसे किसी किस्म की आर्थिक मदद
बी भारत सरकार से नहीं मिल रही. उस कार्यक्रम में मैंने आज सुलेख
प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, वाचन प्रतियोगिता, कविता पाठन
प्रतियोगितम, भाषण प्रतियोगिता, नारे प्रतियोगिता, स्वरचित कविता, स्वरचित
कहानी, हिंदी गीत, एकांकी प्रतियोगिता, और बच्चों द्वारा बनाये गए
प्रोजेक्ट्स जिसमे उन्हें हर शब्द को हिंदी में लिखना था, वो सब देखें.
मैं उसका हिंदी के प्रति समर्पण देख कर बहुत भावुक हो उठा.
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