Saturday, 29 September 2012

श्री लंका



 
हर चोराहे और शहरो में शुशोभित असंख्य
छोटी  बड़ी  और विशालकाए प्रतिमाए
बोद्धिसत्व प्राप्त करते महात्मा बुद्ध की,
अमन चैन का आशीर्वाद देते पूरे राष्ट्र को
मानों  देते मंत्र  शांति, सुख  और समृधि का



तपती धरती हर दम  पाती,  ढेरो बादलों का स्नेह,
प्रकृति के अनमोल रत्नों से भरपूर,
नदियों और स्वच्छ जलो के झरनों,
हरियाली और शीतल  बयार  से भरपूर,
समुन्द्र तट से ऊँची  पर्वत श्रंखलाओं के बीच,
बसा यह शांति प्रिय राष्ट्र, भाई चारे का सन्देश
लिए, अपनी ही प्रभुसत्ता कायम रखने  के लिए
संघर्षरत है, लगातार  दिन रात, दिन रात

सब धर्मो का सम्मान, मिलजुल कर रहने का प्रयास
कहीं कोई धार्मिक विवाद नहीं, कहीं  कोई  वैमनस्य नहीं
न जाने किसकी गन्दी नज़र पड़ी और किसकी सियासी
शतरंज पर उलझा रहा आन्तरिक गृह-युद्ध में तीन दशक
अपने कल की कड़वाहट  भुला, मिलजुल कर बना रहा है अपना
आने वाला कल, पता नहीं अब किसकी काली निगाह पड़ेगी इसके
प्रयासों पर, डर है कहीं फिर से वो अंधरे, ढक न दे इसकी रौशनी

विनोद पासी "हंसकमल"

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