नमस्कार अवं शुभ संध्या,
सभी गणमान्य व्यक्तियों तथा आप सब को मेरी और से हार्दिक अभिनन्दन.
आप में से कुछ लोग जानते होंगे क़ि भारत के हर प्रान्त, हर राज्य की अपनी एक अलग भाषा है, जैसे महाराष्ट्र में मराठी, पंजाब में पंजाबी, आंध्र प्रदेश में तेलगू, केरल में मलयालम, तमिल नाडू में तमिल, गुजरात में गुजराती, ओरिसा में उड़िया, जम्मू कश्मीर में डोगरी, गोवा में कोंकणी इत्यादि. यह भाषाएँ अपने अपने श्रेत्रो में बोली और समझी जाती है. पूरे विशाल भारत में 48 से अधिक भाषाए बोली जाती है और उनमे से 22 से अधिक भाषाएँ ऐसी है जिन्हें भारतीय सविधान के द्वारा मान्यता प्राप्त है. पर पूरे देश को एक ऐसी भाषा की ज़रुरत थी , जिससे पूरे देश को एक डोर में बांधा जा सके. स्वत्रन्त्र भारत नें, संस्कृत से निकली हिंदी, को ही अपनी राष्ट्र भाषा चुना और देवनागरी लिपि को अपनाया. आज भारत के कई राज्य जैसे, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, झार-खंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तरा- खंड आदि नें हिंदी भाषा को सरकारी काम काज की भाषा बना लिया है. आज भारत के हर प्रान्त और श्रेत्र का व्यक्ति हिंदी में बोल कर अपने आपको व्यक्त कर सकता है.
भारत के बाहर भी बहुत से देशो में हिंदी पढाई,
बोली और समझी जाती है, जिनमे मुख्य देश है, श्री लंका, mauritius ,
फिजी, वेस्ट indies , चेक रेपुब्लीक, उक्रैने, रशिया, नोर्वे, स्वीडन,
फिनलैंड, इंग्लैंड, इटली, फ्रांस, कनाडा, अमेरिका, जर्मनी, रूस, मलेशिया,
सिंगापूर, विएतनाम, कोरा, जापान, पाकिस्तान, बंगलादेश, नेपाल, कुवैत,
सउदी अरेबिया, बहरीन इत्यादि.
कार्यक्रम शुरू करने से पहले मैं आपको अपनी एक छोटी सी कविता सुनाना चाहता हूँ.
हिंदी भाषा है वो धागा जिसकी माला ने है सब को बांधा
तमिल, तेलुगु, कन्नड़, डोगरी, मलयालम,
कोंकणी, मराठी, गुजराती,पंजाबी, बंगला,
संस्कृत,है वो नवरत्न मनके इस माला के
यह भारतीय भाषाएँ ही है चमकते सितारे
उस माला की जो शोभ्यामान है भारत माता के गले की
इस माला को कभी बिखरने मत देना
आयो मिलकर बनाये इतना मज़बूत इस धागे को
क़ि फिर कभी किसी से य़े टूट न पाए
यह टूट गया तो कुछ न बचेगा,
कुछ न बचेगा, कुछ न बचेगा
हिंदी दिवस के इस सुअवसर पर,आप लोगो के सामने एक सांस्कृतिक संध्या पेश कर रहे है.इस कार्यक्रम को भारतीय कला केंद्र के विधार्थियों ने बहुत लगन से बनाया है. हम आशा करते है की आप लोंगों को यह कार्यक्रम बहुत पसंद आयेगा.
धन्यवाद
सभी गणमान्य व्यक्तियों तथा आप सब को मेरी और से हार्दिक अभिनन्दन.
जैसा की आप लोग जानते ही है क़ि हिंदी भारत की राष्ट्र भाषा है और केंडी
में हमारे कार्यालय में हिंदी की औपचारिक शिक्षा भी दी जाती है. हर वर्ष
सेंकडो विद्यार्थी हमारे यहाँ से हिंदी में ज्ञान प्राप्त कर रहे है हम
चाहते है अधिक से अधिक श्री लंका के नागरिक, चाहे वो किसी भी भाषा को बोलते
हो, हिंदी भाषा का ज्ञान ग्रहण करे. आज आप जो कार्यक्रम देखेंगे वो
भारतीय कला केंद्र के बच्चों के द्वारा ही बनाया गया है. श्री लंका के कई
colleges और
स्कूलों में भी हिंदी भाषा को पड़ाने का भी विधिवत कार्यक्रम चल रहा
है और यहाँ उन कई स्कूलों और colleges के अध्यापक और विधार्थी मौजूद है.
आप सभी का यहाँ हार्दिक स्वागत है
आप में से कुछ लोग जानते होंगे क़ि भारत के हर प्रान्त, हर राज्य की अपनी एक अलग भाषा है, जैसे महाराष्ट्र में मराठी, पंजाब में पंजाबी, आंध्र प्रदेश में तेलगू, केरल में मलयालम, तमिल नाडू में तमिल, गुजरात में गुजराती, ओरिसा में उड़िया, जम्मू कश्मीर में डोगरी, गोवा में कोंकणी इत्यादि. यह भाषाएँ अपने अपने श्रेत्रो में बोली और समझी जाती है. पूरे विशाल भारत में 48 से अधिक भाषाए बोली जाती है और उनमे से 22 से अधिक भाषाएँ ऐसी है जिन्हें भारतीय सविधान के द्वारा मान्यता प्राप्त है. पर पूरे देश को एक ऐसी भाषा की ज़रुरत थी , जिससे पूरे देश को एक डोर में बांधा जा सके. स्वत्रन्त्र भारत नें, संस्कृत से निकली हिंदी, को ही अपनी राष्ट्र भाषा चुना और देवनागरी लिपि को अपनाया. आज भारत के कई राज्य जैसे, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, झार-खंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तरा- खंड आदि नें हिंदी भाषा को सरकारी काम काज की भाषा बना लिया है. आज भारत के हर प्रान्त और श्रेत्र का व्यक्ति हिंदी में बोल कर अपने आपको व्यक्त कर सकता है.
कार्यक्रम शुरू करने से पहले मैं आपको अपनी एक छोटी सी कविता सुनाना चाहता हूँ.
हिंदी भाषा है वो धागा जिसकी माला ने है सब को बांधा
तमिल, तेलुगु, कन्नड़, डोगरी, मलयालम,
कोंकणी, मराठी, गुजराती,पंजाबी, बंगला,
संस्कृत,है वो नवरत्न मनके इस माला के
यह भारतीय भाषाएँ ही है चमकते सितारे
उस माला की जो शोभ्यामान है भारत माता के गले की
इस माला को कभी बिखरने मत देना
आयो मिलकर बनाये इतना मज़बूत इस धागे को
क़ि फिर कभी किसी से य़े टूट न पाए
यह टूट गया तो कुछ न बचेगा,
कुछ न बचेगा, कुछ न बचेगा
हिंदी दिवस के इस सुअवसर पर,आप लोगो के सामने एक सांस्कृतिक संध्या पेश कर रहे है.इस कार्यक्रम को भारतीय कला केंद्र के विधार्थियों ने बहुत लगन से बनाया है. हम आशा करते है की आप लोंगों को यह कार्यक्रम बहुत पसंद आयेगा.
धन्यवाद

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