गरीबो का शरीर अमीरों जितना नाज़ुक नहीं होता
बस उनकी मूलभूत ज़रूरते कुछ ज्यादा होती है
यह चंद रुपयों और और पेट की ज़रूरते
वही उन्हें पत्थर कूटने, जंगल काटने,
मरे जानवरों की ख़ाल उतारने की,
नालियों का कूड़ा करकट साफ़ करने,
क़ि शक्ति प्रदान करती है
वर्ना उनका भी मन करता है कुछ पल
बेठे चैन से, और आन्नद ले जीवन का
विनोद पासी "हंसकमल"
बस उनकी मूलभूत ज़रूरते कुछ ज्यादा होती है
यह चंद रुपयों और और पेट की ज़रूरते
वही उन्हें पत्थर कूटने, जंगल काटने,
मरे जानवरों की ख़ाल उतारने की,
नालियों का कूड़ा करकट साफ़ करने,
क़ि शक्ति प्रदान करती है
वर्ना उनका भी मन करता है कुछ पल
बेठे चैन से, और आन्नद ले जीवन का
विनोद पासी "हंसकमल"
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