Sunday, 3 February 2013

करवा चौथ


करवा चौथ

कई दिनों से सुन रही हूँ
करवा चौथ सुहागनों के
सुहाग का दिन आने वाला है
लो आ गया वो दिन भी आज

सुबह सवेरे, उठ कुछ खा लिया
और दिन भर न पिया पानी
अपने उस पिया की दीर्घायु
के लिए, जो मेरे मरणोपरांत
कुछ ही दिनों में पहना देगा
यह जंजीर एक नए गले में

नयी साड़ियों जेवरातों में सज
इंतज़ार करना है शाम तक
उस चंद्रमा का जो अक्सर
देर से निकलता है आज, भूखे पेट
कोई कैसे करे कुछ और कामना
जब हर पल सताती हो पेट की ज्वाला
और मांगना है आशीष उससे
जिसे स्वयम नहीं पता अपनी उम्र


आज मेंउनपर निर्भर भी नहीं,
उनकी नहीं, सलामती चाहती हूँ अपनी भी
जिनके लिए मैं लुटा रही हूँ अपनी ज़िन्दगी हंसी-ख़ुशी
क्या मेरे लिए भी कभी कोई रखेगा ऐसा व्रत ख़ुशी-ख़ुशी ?

विनोद पासी हंसकमल

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