Sunday, 1 July 2012

बाढ़ (जल-विभिषका)


बाढ़  (जल-विभिषका)

बाढ़  असम की हो या बिहार की
बंगाल की हो या उड़ीसा    की
रंग-रूप सबका एक सा ही होता है

जान-माल के क्षति- पूर्ती कम हो या ज्यादा
जात-पाँत  की सीमायों का बंधन भूल
हर ह्रदय में क्रंदन एक सा ही होता है

चंद टुकडो से क्षति पूर्ती क्या होगी?
बिछुड़ जाता है जब कोई अपना
जहाँ सबका एक सा ही बर्बाद होता है

भाषाई जंजालो में व्यथा चाहे न बंध पाए
तस्वीरो में बर्बादी शायद न समां पाए
पर पथराये नयन-औ-नीरो का
मतलब एक सा ही होता है


विनोद पासी "हंसकमल"

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