जीवन-
कडवा ज़हर
पिया नहीं जाता
आत्महत्या-
ऐसे गलत कदम
जो सुधारा नहीं जाता
व्यक्तित्व -
इतना बोना
भीड़ में नज़र नहीं आता
विचार=धाराएँ -
उन्मुक्त पंछी सी
समाज पकड़ नहीं पता
पलायनवादी दृष्टिकोण -
कायरतापूर्ण विचार
अपनाया नहीं जाता
भविष्य-
धुंए की लकीर
नज़र नहीं आता
मंजिल अस्पष्ट
फिर भी
उठाया कदम
लोटाया नहीं जाता
बोझ-
ज़िन्दगी का
बिन सहारे उठाया नहीं जाता
विनोद पासी "हंसकमल'
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