Sunday, 1 July 2012

आत्म बीती



जीवन-
कडवा ज़हर
पिया नहीं जाता

आत्महत्या-
ऐसे गलत कदम
जो सुधारा नहीं जाता

व्यक्तित्व -
इतना बोना
भीड़ में नज़र नहीं आता

विचार=धाराएँ -
उन्मुक्त पंछी सी
समाज पकड़ नहीं पता

पलायनवादी दृष्टिकोण -
कायरतापूर्ण विचार
अपनाया नहीं जाता

भविष्य-
धुंए की लकीर
नज़र नहीं आता

मंजिल अस्पष्ट
फिर भी
उठाया कदम
लोटाया नहीं जाता

बोझ-
ज़िन्दगी का
बिन सहारे उठाया नहीं जाता

विनोद पासी "हंसकमल'

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