तेरे रुखसार पर एक बोसा लगा लूं
याद बन जाए जो वो लम्हा जी लूं
बंद पलकों के कटोरे को चूम
जलते लबों की प्यास बुझा लूं
अधर-पंखुड़ियों पर रंग आया नूर का
कपोलों पर लालिमा छाई सूर्यास्त की
लोचोनो में आयी झलक मस्ती की
देख लूं, जी लूं, वो पल तेरे साथ
मेरे हमदम मेरे दोस्त
विनोद पासी "हंसकमल"
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