व्याकुल मन कुछ धीर करो
मन में थोडा संतोष धरो
धीरज रख संतोष करो
क्यों रक्तचाप बढ़वाते हो
क्यों समय से पहले चाहते हो
जो मिलना है वो मिल के रहेगा
उसमे क्यों परेशां रहते हो
धीरज रख संतोष करो
क्यों रक्तचाप बढ़वाते हो
क्यों समय से पहले चाहते हो
जो मिलना है वो मिल के रहेगा
उसमे क्यों परेशां रहते हो
क्या दुष्परिनाम होंगे चिन्ताओ से
इसकी भी चिंता कर लो तुम
ज्यादा भाग दौड़ में कुछ नहीं रखा
निहारो पल भर प्रकति को भी तुम
क्या कर लोगो कल को जान कर
क्या कर लिया अपना बीता कल जान
ज्यादा भाग दौड़ में कुछ नहीं रखा
निहारो पल भर प्रकति को भी तुम
क्या कर लोगो कल को जान कर
क्या कर लिया अपना बीता कल जान
क्या कर लोगो सब कुछ पाकर
क्या कर लोगो आगे जाकर
सब कुछ तो यहीं छूटना है
फिर क्यों है इतनी भाग दौड़
क्या कर लोगो आगे जाकर
सब कुछ तो यहीं छूटना है
फिर क्यों है इतनी भाग दौड़
विनोद पासी "हंसकमल'
No comments:
Post a Comment