Wednesday, 4 July 2012


उस घर में कुछ  बर्तन गिरे या फेंके गए
शायद पीतल के  होंगे  या स्टील के, पता नहीं 
जोर से आवाज  निकली और चल पड़ी
छन छन करती घर से बाहर
हमने उस आवाज से ही अनुमान लगाया
ज़रूर य़े उसके पति ने गुस्से में फेंके होंगे
खाना उसकी पसंद का नहीं बना होगा
या हो सकता है उसने पति द्वारा पीटे जाने पर
खुद ही फेंकें हो, अपना गुबार निकालने के लिए
या अपने आप ही संतुलन खोकर गिरने लगे हो

पर छन छन  की आवाज ने उसके घर को
जोड़ दिया था हमारे और कुछ और घरो से
जैसे उन घरों में कोई दूरी ही न नो जबकि
उसका घर हमारे घर  से कुछ दूरी पर था
पर ध्वनि ने  मिटा दी थी सारी दूरियां
और संवाद  शुरू हो गया था उस पल से


विनोद पासी "हंसकमल"

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