उस घर में कुछ बर्तन गिरे या फेंके गए
शायद पीतल के होंगे या स्टील के, पता नहीं
जोर से आवाज निकली और चल पड़ी
छन छन करती घर से बाहर
हमने उस आवाज से ही अनुमान लगाया
ज़रूर य़े उसके पति ने गुस्से में फेंके होंगे
खाना उसकी पसंद का नहीं बना होगा
या हो सकता है उसने पति द्वारा पीटे जाने पर
खुद ही फेंकें हो, अपना गुबार निकालने के लिए
या अपने आप ही संतुलन खोकर गिरने लगे हो
पर छन छन की आवाज ने उसके घर को
जोड़ दिया था हमारे और कुछ और घरो से
जैसे उन घरों में कोई दूरी ही न नो जबकि
उसका घर हमारे घर से कुछ दूरी पर था
पर ध्वनि ने मिटा दी थी सारी दूरियां
और संवाद शुरू हो गया था उस पल से
विनोद पासी "हंसकमल"
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