Monday, 23 July 2012

इन्सान



कैसे करते होंगे  लोग बातचीत
जब  भाषायो का जंजाल न था
कैसे बयाँ करते थे दुःख दर्द  
जब शब्दों के सहारे न थे

पलकों  की भी  क्या कोई भाषा होती है
आंसुयों की क्या कोई भाषा होती है
ख़ुशी और गम यूं ही  बयां हो जाते है
जब इन्सान इंसान के करीब होते है

बिन भाषा  के भी  रिश्ते बन जाते है
बिन भाषा के  भी संवाद हो जाते है
बिन भाषा के  भी आत्मीयता हो जाती है
बिन भाषा के भी ज्ञान हो  जाता है

जो मन की भावनायों को समझ सके
जो बिना शब्द जाल बुने  दिल को छू ले
जो आँखों में आंखे डाल भाव पड़ ले
जो बिन कहे ही काफ़ी कुछ जान ले

उसी को इंसान कहते है, उसी को इन्सान कहते है


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