बाबा रामदेव के भारत स्वाभिमान से प्रेरित होकर
जब तक चारो और प्रलय न आ जाएँ
जब तक दुश्मन घर में न आ जाएँ
जब तक आतंकी मौत न बरसा जाएँ
जब तक घोटालों की बाड़ न आ जाये
जब तक करप्शन अपना अस्तित्व न मिटा दें
जब तक बीमार व्यवस्थाएं हमारी जड़ें न उखाड़ दें
जब तक मायोवाद की हिंसक क्रूर सेना
पूरे देश को न तबाह कर दें
जब तक किसानों की आत्म- हत्याएं
तुम्हें नींद से न जागने को मजबूर करें
तुम सोये रहना, प्रिय तुम सोये रहना
कब तक सोयें रहोगे, मेरे देशवासियों
कब तक कोसोगे, अपनी नियति को
कब तक नकारते रहोगे, नग्न सत्य को
कब तक सहोगे, अपना आर्थिक शोषण
कब तक सहोगे, मानव मूल्यों का हरण
क्या लूटतंत्र का भी कोई अंत होता है?
क्या कभी न जागने की कसम खायी है?
उठो ! पहचानो देश के दर्द को
देखो माँ भारती की रुग्न आत्मा को
पहचानो समय की छाप को
तुम्हारे ही इर्द-गिर्द दस्तक दे रही है
भारत स्वाभिमान की वो क्रांति
जिसकी बागडोर संभाली है उस सन्यासी ने
जिसने बांधा है पूरे हिंदुस्तान को
अपनी योगाग्नि से, और सिखाया है
हमें शान से जीना , अपने महत्व को पहचानना
जिसने विदेशो से काले धन को लाने की
भ्रष्ट व्यवस्थायों को उखाड़ फेंकने की
कसम खायी है, जिसकी फकीरियत ने
देश में आशा की किरण जगाई है
राजनैतिक दलों में खलबली मचाई है
वो बहा देगा इस जन-आन्दोलन में
इन चरमराती व्यवस्थायों को और
स्थापित करेगा, एक ऐसी व्यवस्था
जो पूर्णता हमारी अपनी होगी
पूर्णता स्वदेशी
कहीं ऐसा न हो, ये आंधी बहा ले जाये तुम्हें
और तुम सोये ही रह जायो, बस सोये ही रह जायो
उठो जुड़ों उस जन-क्रांति से , अब न तुम सोये रहना
अब न तुम सोये रहना, बस अब न तुम सोये रहना
विनोद पासी "हंसकमल"
जब तक चारो और प्रलय न आ जाएँ
जब तक दुश्मन घर में न आ जाएँ
जब तक आतंकी मौत न बरसा जाएँ
जब तक घोटालों की बाड़ न आ जाये
जब तक करप्शन अपना अस्तित्व न मिटा दें
जब तक बीमार व्यवस्थाएं हमारी जड़ें न उखाड़ दें
जब तक मायोवाद की हिंसक क्रूर सेना
पूरे देश को न तबाह कर दें
जब तक किसानों की आत्म- हत्याएं
तुम्हें नींद से न जागने को मजबूर करें
तुम सोये रहना, प्रिय तुम सोये रहना
कब तक सोयें रहोगे, मेरे देशवासियों
कब तक कोसोगे, अपनी नियति को
कब तक नकारते रहोगे, नग्न सत्य को
कब तक सहोगे, अपना आर्थिक शोषण
कब तक सहोगे, मानव मूल्यों का हरण
क्या लूटतंत्र का भी कोई अंत होता है?
क्या कभी न जागने की कसम खायी है?
उठो ! पहचानो देश के दर्द को
देखो माँ भारती की रुग्न आत्मा को
पहचानो समय की छाप को
तुम्हारे ही इर्द-गिर्द दस्तक दे रही है
भारत स्वाभिमान की वो क्रांति
जिसकी बागडोर संभाली है उस सन्यासी ने
जिसने बांधा है पूरे हिंदुस्तान को
अपनी योगाग्नि से, और सिखाया है
हमें शान से जीना , अपने महत्व को पहचानना
जिसने विदेशो से काले धन को लाने की
भ्रष्ट व्यवस्थायों को उखाड़ फेंकने की
कसम खायी है, जिसकी फकीरियत ने
देश में आशा की किरण जगाई है
राजनैतिक दलों में खलबली मचाई है
वो बहा देगा इस जन-आन्दोलन में
इन चरमराती व्यवस्थायों को और
स्थापित करेगा, एक ऐसी व्यवस्था
जो पूर्णता हमारी अपनी होगी
पूर्णता स्वदेशी
कहीं ऐसा न हो, ये आंधी बहा ले जाये तुम्हें
और तुम सोये ही रह जायो, बस सोये ही रह जायो
उठो जुड़ों उस जन-क्रांति से , अब न तुम सोये रहना
अब न तुम सोये रहना, बस अब न तुम सोये रहना
विनोद पासी "हंसकमल"
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