बादलों का झुण्ड
कहाँ जा रहा है
यह बादलों का झुण्ड
धरती तो यहाँ की प्यासी है
क्या इन्हें धरती का गुरुत्वाकर्षण
भी बरसाने में असमर्थ है?
इन दिनों आस रहती है हर उस बूँद की
जो मिटा सके धरती की प्यास
पर जल-कण खेलते है आँख मिचोली
दिखला के सपने हज़ार, बदल घूमते
रहते है आवारा, कभी गरजते है
तो कभी यूं ही चक्कर लगा चले जाते है
मानों कोई रस्सा-कशी का खेल चल रहा हो
कुछ प्यासे धरती के टुकडो में
विनोद पासी "हंसकमल"
कहाँ जा रहा है
यह बादलों का झुण्ड
धरती तो यहाँ की प्यासी है
क्या इन्हें धरती का गुरुत्वाकर्षण
भी बरसाने में असमर्थ है?
इन दिनों आस रहती है हर उस बूँद की
जो मिटा सके धरती की प्यास
पर जल-कण खेलते है आँख मिचोली
दिखला के सपने हज़ार, बदल घूमते
रहते है आवारा, कभी गरजते है
तो कभी यूं ही चक्कर लगा चले जाते है
मानों कोई रस्सा-कशी का खेल चल रहा हो
कुछ प्यासे धरती के टुकडो में
विनोद पासी "हंसकमल"
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