शिव वंदना करे तुम्हारी, तुम्ही ने डोर संभाली
भोले नाथ हो या भंडारी, तुमरी लीला अजब न्या री
रहतो हो बर्फीले पहाड़ो पर, कैलाश के होके रह गए तुम
कण कण में समाये तुम, मेरे ह्रदय में बस गए हो तुम
खूब पारखी निकले तुम, खुद ही मुझको तराश दिया
तुम्हारे दर्शन को अभिलाषी, चाहे कभी न आ पाऊ कैलाश
मन मंदिर के शिवालय में स्थापित कर ली तुम्हरी मूर्त
विनोद पासी "हंसकमल"
भोले नाथ हो या भंडारी, तुमरी लीला अजब न्या
तुमरी सूरत भोली भाली, मुख पर है अजब सी लाली
कर्म बहुत बलशाली, ध्वस्त करन की भी है शक्ति
पूजे जाते हो लिंग रूपों में, घिरे रहतो हो सर्पो से
चलते बैल पे सवार , कर के गंगा को संभाल
कुछ तो होगा अमर प्रेम, पार्वती चुने वर हर जन्म
कर्म बहुत बलशाली, ध्वस्त करन की भी है शक्ति
पूजे जाते हो लिंग रूपों में, घिरे रहतो हो सर्पो से
चलते बैल पे सवार , कर के गंगा को संभाल
कुछ तो होगा अमर प्रेम, पार्वती चुने वर हर जन्म
रहतो हो बर्फीले पहाड़ो पर, कैलाश के होके रह गए तुम
कण कण में समाये तुम, मेरे ह्रदय में बस गए हो तुम
खूब पारखी निकले तुम, खुद ही मुझको तराश दिया
तुम्हारे दर्शन को अभिलाषी, चाहे कभी न आ पाऊ कैलाश
मन मंदिर के शिवालय में स्थापित कर ली तुम्हरी मूर्त
विनोद पासी "हंसकमल"
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