Wednesday, 4 July 2012

नयी सुबह



नयी आशाएं और अपेक्षाएं
मरुस्थल में एक नयी आस लिए
उगते सूरज से भरपूर आकाश लिए
खामोश कदमो से  एक नयी प्यास लिए
एक मृगतृष्णा का रूप लिए
जीवन के सुखद  और कठोर  पलों को समेटे
अपने तन-मन से लिपटाये हुए
आन खड़ी है ज़िन्दगी, मेरे ही आंगन में
एक नया अक्स लिए


यह मैं हूँ या मेरी परछाई  है
पर जो भी है मन भाई है
एक साथी नया नवेला है
जो हर पल मुझ संग जीता है
मेरे ख्यालों को ऐसे पड़ता है
जैसे नज़र आते हो उसको 


विनोद पासी "हंसकमल

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