ढांचा
हड्डियों का
एक----
धंसी ऑंखें
पोपला मुहँ
खुश्क होंठ
नंगे फटे पाँव
सर्प-की काली देह
धनुष-सदृश्य
झुकी कमर
मैली-कुचैली धोती पहने
साठ बर्ष से चला आ रहा है
पूंजीवाद से समाजवाद के
अंधकारमय पथ पर
लेता स्वपन समाजवाद के
इस समाजवाद के तथाकथित नेता
सपनो की चाशनी में भिगोकर
बेच रहे है भूखी-नंगी जनता को
मुलभुत ज़रूरतों के रंगीन ख्वाब
कर रहे उनकी भावनायों से बलात्कार
और स्वयं बन रहे है पूंजीपति
समाजवाद के नाम पर
विनोद पासी "हंसकमल"
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