Monday, 2 July 2012

महात्मा गाँधी की आत्मा की आवाज


मैं राजघाट से  गाँधी नहीं,  
उसकी आत्मा बोल रहा हूँ
मेरी समाधी पर वर्षो से शीश झुका रहे है
भारत के भ्रष्ट और बेईमान नेता और अपने 
काले कृत्यों में मुझे जोड़ दुःख पहुचाते हैं
जानते हुए भी  की मैंने  ऐसे भारत की
कभी परिकल्पना भी नहीं की थी.
आते है कई  विश्व नेता भी जो मुझे
भारतियों  से अधिक जानते है
जो सचमुच मुझसे स्नेह करते  है
मेरे दर्शन को जानते है,
मुझसे प्रेरणा लेते है

क्या भारत में ऐसी कोई जगह है
जहाँ मेरी तस्वीर न छपी  हो
और जहाँ मेरा निरादर न हो
यहाँ तक की सबसे अधिक काले धन की
भारतीय मुद्रा पर भी मेरी ही तस्वीर छाप दी


मैं कोई व्यक्ति नहीं हूँ
न  ही यह मेरा निवास स्थान है.
मैं एक विचारधारा हूँ जो असंख्य
लोगो के दिलो में बस्ती है
मैं प्रतिबिम्ब  हूँ उन  करोड़े देशवासियों का.
मेरी समाधी पर आ कर फूल
अर्पित करने  वालो, कभी अपने अन्दर
झांक कर देखो,  क्या कभी
तुमने उन आदर्शो को अपने जीवन
में जीने का प्रयास भी किया  है, 
जिनके लिए  लिए मैंने अपना
पूरा जीवन  जी कर दिखलाया,
मेरा दर्शन  समझने की कोशिश तो  करो,
मैं भारत की आत्मा हूँ, मेरे  दर्शन में ही
छिपा  है भारत की समस्याओ का हल

यहाँ  सत्यागढ़ के  ढकोसले  मत करो
दुःख होता है मेरी आत्मा को
मुझे किसी की गोली ने नहीं मारा
मारा है तो बेईमान भ्रष्ट राजनेताओ
नौकरशाहों और व्यव्सहियो ने

मेरी समाधी कोई पर्यटन  स्थल नहीं
यहाँ  आकर  फूल मत अर्पण  करो
यह भारत मेरे सपनो का भारत  नहीं
अब यहाँ अहिंसा परमो धर्म नहीं
यहाँ तस्वीर मत खिचवाया करो
क्योंकि मैं तो कब का  छोड़ चुका हूँ
इस राजघाट को, जन्म ले चुका हूँ
किसी और के रूप में
और तुम पूजे जा रहे हो ........


तुमने मेरे सपनो के भारत को
कुत्सित राजनेतिक चालों से 
बदल दिया है एक भ्रष्ट राष्ट्र में
अब  तो मेरी तस्वीर भारतीय  मुद्रा से हटा,
छाप दो उन चेहरों को जिन्होंने लूटा है
मेरे भारत की भोली भाली  मासूम जनता हो
और मुझे चैन से बैठ कर पश्चाताप करने दो
की मैंने क्यों भारत को आज़ाद कराने  की  गलती की

विनोद पासी "हंसकमल" 

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