Saturday, 4 August 2012

हम पल पल गिनते  रहते है
और समय निकलता जाता है
हम सपने  ही बुनते रहते है
और समय निकलता जाता है

जो हर पल कुछ करते रहते  है
वो ही कुछ बन  पाते है
इतिहास उन्ही से बनता है
लोगो की जुबां पे छाते है

जो सोचते ही रहते है
वो सोचते ही रह जाते है
कोई और कारवां बना
आगे निकल जाता है

मत सोचे आगे चलकर
क्या रूप होगा तुम्हारी सोच का
बेठो न ख़ाली पल भर को
पर हरपल कुछ काम करो

हर बड़ा कार्य, संस्था या आन्दोलन
शुरू हुए थे किसी एक सोच से ही
साथी और प्रबंधक मिल जायेंगे
न निराश रहो कभी पल भर
बस सृजन का तुम काम करो
बस सृजन का तुम कम करो

विनोद पासी "हंसकमल"

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