हम पल पल गिनते रहते है
और समय निकलता जाता है
हम सपने ही बुनते रहते है
और समय निकलता जाता है
जो हर पल कुछ करते रहते है
वो ही कुछ बन पाते है
इतिहास उन्ही से बनता है
लोगो की जुबां पे छाते है
जो सोचते ही रहते है
वो सोचते ही रह जाते है
कोई और कारवां बना
आगे निकल जाता है
मत सोचे आगे चलकर
क्या रूप होगा तुम्हारी सोच का
बेठो न ख़ाली पल भर को
पर हरपल कुछ काम करो
हर बड़ा कार्य, संस्था या आन्दोलन
शुरू हुए थे किसी एक सोच से ही
साथी और प्रबंधक मिल जायेंगे
न निराश रहो कभी पल भर
बस सृजन का तुम काम करो
बस सृजन का तुम कम करो
विनोद पासी "हंसकमल"
और समय निकलता जाता है
हम सपने ही बुनते रहते है
और समय निकलता जाता है
जो हर पल कुछ करते रहते है
वो ही कुछ बन पाते है
इतिहास उन्ही से बनता है
लोगो की जुबां पे छाते है
जो सोचते ही रहते है
वो सोचते ही रह जाते है
कोई और कारवां बना
आगे निकल जाता है
मत सोचे आगे चलकर
क्या रूप होगा तुम्हारी सोच का
बेठो न ख़ाली पल भर को
पर हरपल कुछ काम करो
हर बड़ा कार्य, संस्था या आन्दोलन
शुरू हुए थे किसी एक सोच से ही
साथी और प्रबंधक मिल जायेंगे
न निराश रहो कभी पल भर
बस सृजन का तुम काम करो
बस सृजन का तुम कम करो
विनोद पासी "हंसकमल"
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