आज धूप कुछ ज्यादा ही तेज
निकल आयी है, सूर्य के गर्भ से
उस भूभर्ग में जहाँ मैं रह रहा हूँ
निकल आयी है, सूर्य के गर्भ से
उस भूभर्ग में जहाँ मैं रह रहा हूँ
कहीं और शायद ये किरणें मोहक होगी
और कहीं लोग अभी इसकी किरणों
को भी देखने को भी बेचैन होगें
और कहीं लोग अभी इसकी किरणों
को भी देखने को भी बेचैन होगें
आज निकलना मजबूरी न होता
तो कभी न निकलता
घर में रह भी क्या करता?
बिजली तो कई घंटे गुल रहनी है
हर तरफ तो भीड़ है लोगों की
सब तो परेशान नहीं लगते इस धूप से
जो भी बाहर है, है किसी मजबूरी में हो
ऐसा भी नहीं लग रहा है मुझे
समुन्दरो के किनारे कुछ विदेशी
तो 'सन टेन' कर रहे होंगे बेझिझक
उन्हें यह तेज धूप आकर्षित कर
लाई है मेरे देश में, और
मैं खामखाँ परेशां हो रहा हूँ
इसके तेज से
सोच रहा हूँ की चलो दोस्ती
का हाथ बड़ा दूँ इस धूप से,
पसीना पोछने से ही फुर्सत कहाँ
लगता है लोगों ने पहले से ही
दोस्ती कर ली है इस तेज धूप से
एक खाते पीते इंसान को
शायद धूप तेज ही लगती होगी
वर्ना तो सब की दोस्ती है इससे
तो कभी न निकलता
घर में रह भी क्या करता?
बिजली तो कई घंटे गुल रहनी है
हर तरफ तो भीड़ है लोगों की
सब तो परेशान नहीं लगते इस धूप से
जो भी बाहर है, है किसी मजबूरी में हो
ऐसा भी नहीं लग रहा है मुझे
समुन्दरो के किनारे कुछ विदेशी
तो 'सन टेन' कर रहे होंगे बेझिझक
उन्हें यह तेज धूप आकर्षित कर
लाई है मेरे देश में, और
मैं खामखाँ परेशां हो रहा हूँ
इसके तेज से
सोच रहा हूँ की चलो दोस्ती
का हाथ बड़ा दूँ इस धूप से,
पसीना पोछने से ही फुर्सत कहाँ
लगता है लोगों ने पहले से ही
दोस्ती कर ली है इस तेज धूप से
एक खाते पीते इंसान को
शायद धूप तेज ही लगती होगी
वर्ना तो सब की दोस्ती है इससे
विनोद पासी "हंसकमल"
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