तू तू मैं मैं
य़े क्या तू तू मैं मैं लगा रखी है ?
क्या कभी तुम्हारी मैं में मैं नहीं थी
या क्या कभी मेरी मैं में तुम नहीं थे.....
...
कहाँ और कैसे गुम हो गए अपनी अपनी मैं से हम तुम
बस अब दीखता ही नहीं कुछ अपनी मैं से आगे
कब और कैसे खो गए अपनी अपनी मैं में हम
साथ चलते चलते, साथ निभाते निभाते
चलो कुछ कोस पीछे चले
एक दूसरे का हाथ पकड़
और ढूंढे वो पल जब हमारी मैं
में ही छुप्पी थी एक दूसरे की मैं
विनोद पासी "हंसकमल"
य़े क्या तू तू मैं मैं लगा रखी है ?
क्या कभी तुम्हारी मैं में मैं नहीं थी
या क्या कभी मेरी मैं में तुम नहीं थे.....
...
कहाँ और कैसे गुम हो गए अपनी अपनी मैं से हम तुम
बस अब दीखता ही नहीं कुछ अपनी मैं से आगे
कब और कैसे खो गए अपनी अपनी मैं में हम
साथ चलते चलते, साथ निभाते निभाते
चलो कुछ कोस पीछे चले
एक दूसरे का हाथ पकड़
और ढूंढे वो पल जब हमारी मैं
में ही छुप्पी थी एक दूसरे की मैं
विनोद पासी "हंसकमल"
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