Wednesday, 12 June 2013

अब कोई कृष्ण, राम या बुद्ध नहीं आयेगा
अब कोई द्रौपदी कृष्ण को नहीं पुकारेगी
न कोई सीता वर्षो इंतज़ार करेगी राम का
न कोई अहिल्या पड़ी रहेगी पत्थर बन

अब छोडो पूजना इन पत्थर की मूर्तियों को
तराशो मन मंदिर को, दान पुण्य से कुछ न होगा
दान पुण्य भी तो आखिर भीख ही है,
भीख से कब उत्थान हुआ किसी का


वो प्रेरणा-स्रोत्र भी चले गये,
जो खुद भी सर्वगुण संपन न थे
अब तो राह नयी बनानी होगी
खुद ही प्रेरणा स्त्रोत बनना होगा

न क़त्ल करो इंसानियत हथियारों से
बुद्धि को अपना हथियार बनायो तुम
मत जियो स्वर्णिम भारत के सपनो में
जो है उसे ही मिल कर स्वर्णिम बनायो तुम

विनोद पासी "हंसकमल"

No comments:

Post a Comment