Sunday, 16 June 2013

आज मन बहुत उचाट है






मत पूछो मेरे मन का हाल
मत पूछो मेरे घर का हाल
मत पूछो  ऑफिस का हाल
मत पूछो मुझसे कुछ भी आज
आज मन बहुत उचाट है
आज मन बहुत उचाट है


क्या अवसाद कह नहीं पाऊँ
कुछ बात हो तो कह भी पाऊँ
मन में कुछ बेचैनी  पाऊँ 
मन में कुछ उदासी पाऊँ
पर शब्द्रो में उन्हें गढ़ न पाऊँ


न कुछ ऐसा घटा, न कुछ हुआ,
वही साथी, वही संगी, वही प्यारे,
वही ऑफिस, वही मौसम, 
वही चाँद-सूरज, वही है तारे
वही पक्षी, वही ताल किनारे
पर कुछ है कि मन कुछ उचाट है

होता होगा औरो के साथ भी
पर मेरा अनुभव है कुछ नया
कोई कमी नहीं जीवन में
फिर भी मन क्यों  उचाट है
शायद इसको भी कभी कभी
ग़मगीन होने की  कुलबुलाहट होती होगी
शायद इसको  कुछ टूट जाने का
कुछ छूट जाने का पूर्वाग्रह होता होगा


पर अभी तो बस यह  उचाट है
आज मन बहुत उचाट है



 

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