मत पूछो मेरे मन का हाल
मत पूछो मेरे घर का हाल
मत पूछो ऑफिस का
हाल
मत पूछो मुझसे कुछ भी आज
आज मन बहुत उचाट है
आज मन बहुत उचाट है
क्या अवसाद कह नहीं पाऊँ
कुछ बात हो तो कह भी पाऊँ
मन में कुछ बेचैनी
पाऊँ
मन में कुछ उदासी पाऊँ
पर शब्द्रो में उन्हें गढ़ न पाऊँ
न कुछ ऐसा घटा, न कुछ हुआ,
वही साथी, वही संगी, वही प्यारे,
वही ऑफिस, वही मौसम,
वही चाँद-सूरज, वही है तारे
वही पक्षी, वही ताल किनारे
पर कुछ है कि मन कुछ उचाट है
होता होगा औरो के साथ भी
पर मेरा अनुभव है कुछ नया
कोई कमी नहीं जीवन में
फिर भी मन क्यों उचाट है
शायद इसको भी कभी कभी
ग़मगीन होने की कुलबुलाहट होती होगी
शायद इसको कुछ टूट
जाने का
कुछ छूट जाने का पूर्वाग्रह होता होगा
पर अभी तो बस यह उचाट
है
आज मन बहुत उचाट है
No comments:
Post a Comment