Sunday, 16 June 2013

जीवन चक्र



जानते हुए भी कि  मुकरर है सांसे
दुआये करने लगते है अपनी  
और दूसरो की दीर्घ आयु  की......
लम्बी उम्र क्या  पैमाना है
जो आया है उसको तो  जाना है


फिर  उम्र हो कितनी लम्बी
कौन करेगा इसकी गिनती
उम्र वही जो कुछ कर जाये
सकरात्मक जिंदगी जी जाये
लोगों के दिलो दिमाग में,
बस जाये, उनकी धडकनों में


असरदार दुयाएँ होती तो पुनर्जनम क्यों  होते
असरदार दुयाएँ होती तो चिकित्सक क्यों होते
असरदार दुयाएँ होती वृद्ध शरीर बोझ न होते
असरदार दुयाएँ होती थी, तो हर तरफ
वृद्ध  तन और बदसूरत सूरते  होती,
नन्हे फ़रिश्ते और नन्ही परियां कहाँ
मिलती देखने को, संसार कैसे चलता


जनता दुआ करती  है धर्मस्थलो  में
धर्माधिकारी जाते है वातानुकूलित हस्पताल
उनसे करीब भला और कौन होगा खुदा के
जो दुनिया जहान को ज्ञान देते फिरते है 
पर उन्हें भी इस परम सत्य का ज्ञान है
की सांसो का चलना ही जीवन है 





जीवन चक्र चलता  है बस सांसो पर
अगर कहीं कोई स्वर्ग होता तो
क्यों न होते “वो” बैचैन जाने को
उन्हें तो बस तुम्हे स्वर्ग का सपना दिखा
तुम्हारा पैसा और दौलत अपने नाम करनी है



विनोद पासी हंसकमल


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